सनातन धर्म की अमूल्य धरोहर को बचाने की पुकार

राष्ट्रीय युवा वाहिनी की विशेष अपील भारत की पहचान उसकी संस्कृति, परंपरा और सनातन धर्म से है। हजारों वर्षों से सनातन धर्म ने पूरी दुनिया को सत्य, सेवा, करुणा, त्याग और मानवता का संदेश दिया है। हमारे ऋषि-मुनियों, संतों और महापुरुषों ने जिस धर्म और संस्कृति को अपने तप, ज्ञान और बलिदान से सुरक्षित रखा, आज उसी विरासत को बचाने की जिम्मेदारी हम सभी की है।


इसी सनातन गौरव का एक अत्यंत दुर्लभ प्रतीक है भगवान श्री बलराम जी का प्राचीन मंदिर। पूरे भारतवर्ष में भगवान श्री बलराम जी के केवल दो प्रमुख मंदिर बताए जाते हैं — एक काशी में और दूसरा जम्मू में स्थित है। यह मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं बल्कि हमारी ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का जीवंत प्रमाण है। दुर्भाग्यवश जम्मू स्थित यह प्राचीन मंदिर आज जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। मंदिर की दीवारें टूट रही हैं, संरचना कमजोर हो चुकी है और यदि समय रहते इसका संरक्षण नहीं किया गया तो हमारी आने वाली पीढ़ियां इस अनमोल धरोहर से वंचित हो जाएंगी।

ऐसे समय में श्री टेंपल हेरिटेज रिस्टोरेशन ट्रस्ट ने मंदिर के संरक्षण और पुनर्निर्माण का संकल्प लिया है। राष्ट्रीय युवा वाहिनी इस पवित्र अभियान का समर्थन करते हुए देशभर के सनातन प्रेमियों से आगे आने की अपील करती है।

क्या है सनातन धर्म?

सनातन धर्म केवल एक धर्म नहीं बल्कि जीवन जीने की पद्धति है। “सनातन” का अर्थ है — जो अनादि है, जिसका न कोई आरंभ है और न अंत।

सनातन धर्म हमें सिखाता है —

सत्य के मार्ग पर चलना माता-पिता और गुरु का सम्मान करना प्रकृति और जीवों की रक्षा करना मानव सेवा को ईश्वर सेवा मानना धर्म, संस्कृति और राष्ट्र की रक्षा करना यही कारण है कि सनातन धर्म को विश्व का सबसे प्राचीन और सहिष्णु धर्म माना जाता है।