हाई कोर्ट के निर्देशों की खुलेआम अनदेखी, प्रशासनिक उदासीनता से जलस्रोत का अस्तित्व संकट में गुढ़,रीवा। गुढ़ विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत खजुहा कला में स्थित प्राचीन शासकीय तालाब इन दिनों अवैध अतिक्रमण की चपेट में है। ढुडेश्वर नाथ मंदिर के सामने स्थित इस तालाब की भूमि पर स्थानीय अतिक्रमणकारियों द्वारा लगातार कब्जा किया जा रहा है, जिससे तालाब का मूल स्वरूप बिगड़ता जा रहा है और उसका अस्तित्व खतरे में दिखाई दे रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि तालाब की भूमि पर कच्चे,पक्के मकान एवं टीना सेट लगाकर अनेकों निर्माण किए जा रहे हैं, लेकिन राजस्व विभाग के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी मूकदर्शक बने हुए हैं। प्रशासन की निष्क्रियता के कारण अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं और सार्वजनिक जलस्रोत धीरे-धीरे समाप्ति की ओर बढ़ रहा है।
गौरतलब है कि शासकीय तालाबों एवं जलस्रोतों के संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्ट समय-समय पर स्पष्ट निर्देश जारी कर चुके हैं। न्यायालयों ने कहा है कि तालाबों का मूल स्वरूप किसी भी परिस्थिति में परिवर्तित नहीं किया जा सकता तथा तालाब की भूमि पर निजी स्वामित्व या निर्माण पूरी तरह अवैध माना जाएगा। न्यायालयों ने यह भी निर्देशित किया है कि यदि किसी तालाब की भूमि पर अतिक्रमण पाया जाता है, तो राजस्व प्रशासन तत्काल कार्रवाई कर उसे हटाए और जलस्रोत को उसके मूल स्वरूप में बहाल करे।
इसके बावजूद खजुहा कला में न्यायालयीय आदेशों की खुलेआम अवहेलना होती दिखाई दे रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो आने वाले समय में यह तालाब पूरी तरह समाप्त हो सकता है, जिससे जल संरक्षण और पर्यावरण दोनों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, राजस्व विभाग एवं जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि मामले की तत्काल जांच कर अवैध अतिक्रमण हटाया जाए तथा शासकीय तालाब को संरक्षित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए यह जलस्रोत सुरक्षित रह सके।