कई क्रांतियों के बाद मजदूर की ड्यूटी और घण्टे निर्धारित हुए :यशवंत सिंह

अपने वजूद को पुनः कायम करने में ही भलाई

लखनऊ। मजदूर नेता व प्रदेश महामंत्री यशवंत सिंह ने मजदूर दिवस पर साथ आने और एक रहने में ताकत का एहसास कराते हुए कहा कि 1 मई मजदूर दिवस  आप सभी जानते है 1 मई को अमेरिका के शिकागो में काम के घंटे निर्धारित नहीं थे के विरुद्ध मजदूरों से बड़ी रेली की जिसमें पुलिस से बड़ी झड़प हुई गोलियां, बंम का प्रयोग हुआ तमाम मजदूर मारे गए। सैकड़ों घायल हुए उसी क्रांति के बाद मजदूरों के काम के घंटे एक ड्यूटी आठ घंटे की निर्धारित हुई।

उन्होंने कहा कि यह इतिहास है लेकिन अब मजदूर कोई अपने आप को कहता नहीं यह आदत स्वयं और सरकारों ने डाली। अब कोई मजदूर नहीं है अब केवल कर्मचारी है जैसे नियमित, संविदा, आउट सोर्स है वह भी एजेंसियों के बंधुआ मजदूर के नाम के युग बदलने के साथ समय का चक्र फिर हमको वही ले आया है, क्योंकि नाम ही मनुष्य का सबसे प्रभावी होता है। 

उन्होंने कहा नाम ही नहीं रहा तो अब वह ना तो मजदूर नेता रहे न मजदूर रहे और न ही अब कोई क्रांति भी आने वाली है क्योंकि सभी अपना वजूद खो चुके है जब भी कोई मूमेंट बनता है तब हम वर्तमान सरकार को कोसते है, हम जड़ पर वार नहीं करते क्योंकि कि जब तक हम जयचंद सरीखे नेताओं और संगठनों पर वार कर उनको सर्व प्रथम समाप्त नहीं करेंगे हम कोई लड़ाई जीत नहीं सकते। 

अंत में यशवंत सिंह ने कहा कि मित्रो आज जो श्रम कानूनों पर बहुत बहस हो रही है, उस पर बड़े संघर्ष की तैयारी होती है तब कुल 10-20 नेताओं का एकत्र होना भी मुश्कित होता है। साथ ही आज मजदूर भी तो कोई नहीं है हम वर्तमान सरकार को नए कानूनों के लाने के लिए कोस रहे है कोई बताएगा देश में कांग्रेस सरकार अधिक समय तक रही, उनके सहयोग में वाम दल,एवं क्षेत्रीय पार्टियां रही ,राज्यों में अलग अलग पार्टियों की सरकार रही तब क्यों नहीं मजदूरों के लिय अच्छे कानून बना दिए गए अगर ऐसा होता तो वर्षों से श्रम कानूनों में व्यापक मजदूरों के लिए अच्छे कानून बनाए। 

आज उन शहीद हुए हमारे मजदूरों को हम नमन करते हुए उनके बलिदान को याद करते हुए वह सदैव मजदूरों के दिलों में रहेंगे। क्योंकि शहादते कभी भुलाई नहीं जाती है। आओ हम एक हो,एकत्र हो, मिलकर अपने और अपने देश के हित में काम करे।