रामपुर। फिलिस्तीन के राजदूत अब्दुल्लाह अबू शावेश का नूर महल पहुंचने पर पूर्व मंत्री नवाब काज़िम अली खां उर्फ नवेद मियां ने फूल मालाएं पहनाकर परम्परागत रूप से स्वागत किया। राजदूत ने सामाजिक शख्सियत लल्लन खां ठेकेदार के आवास पर आयोजित मीटिंग में हिस्सा लिया। यहां काफी संख्या में जिलेभर के प्रमुख लोग जुटे। उन्होंने सौलत पब्लिक लाइब्रेरी, जामा मस्जिद और इमामबाड़ा किला का भी दौरा किया। रामपुर दौरे के दौरान सामाजिक व राजनैतिक व्यक्तियों के अलावा बुद्धिजीवी वर्ग विशेषकर शिया व सुन्नी उलेमा ने उनका जबरदस्त इस्तक़बाल किया और बढ़ चढ़कर उनके साथ नजर आए। रामपुर में कार्यक्रमों की सफलता से राजदूत भी खुश नजर आए। कार्यक्रमों में फिलिस्तीन के प्रति हमदर्दी और समर्थन देखने को मिला। शहर इमाम हज़रत मौलवी नासिर खां और शिया जामा मस्जिद के इमाम सैयद अली मोहम्मद नक़वी की राजदूत से लंबी बातचीत हुई।
कार्यक्रमों को संबोधित करते हुए फिलिस्तीनी राजदूत अब्दुल्लाह अबूशावेश ने कहा है कि भारत और फिलिस्तीन के संबंध ऐतिहासिक रूप से बहुत मजबूत रहे हैं। भारत ने 1988 में फिलिस्तीन को मान्यता दी थी। भारत यूएन में भी फिलिस्तीन का सपोर्टर रहा है। भारत ने 1996 में गाजा और फिर रामल्लाह में अपने प्रतिनिधि कार्यालय खोले। समय-समय पर भारत ने फिलिस्तीन की फाईनेंशियल और मेडिकल हेल्प की है। भारत सरकार वहां एक अस्पताल भी बना रही है।राजदूत ने कहा कि कला और सांस्कृतिक रूप से भारत के बहुत करीब है फिलिस्तीन की जनता। भारत की कई फिल्में फिलिस्तीन में बहुत लोकप्रिय रही हैं। अमिताभ बच्चन व ज़ीनत अमान समेत की कई किरदार पसंद किए जाते हैं।
पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां के निमंत्रण पर रामपुर पहुंचे राजदूत ने कार्यक्रमों में अपने देश की स्थिति को सामने रखा और अंतर्राष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग दोहराई। राजदूत ने संयुक्त राष्ट्र महिला द्वारा जारी हालिया रिपोर्ट "गाजा में युद्ध का महिलाओं और लड़कियों पर पड़ने वाला प्रभाव" को लेकर अपनी चिंता प्रकट की।
उन्होंने कहा कि गाजा में चल रहे इजरायली युद्ध से फिलिस्तीनी महिलाओं और लड़कियों पर विनाशकारी प्रभाव पड़ रहा है। रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि गाजा में महिलाओं को सबसे अधिक पीड़ा झेलनी पड़ी है। इसमें बताया गया है कि मारे गए लोगों में 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएं और बच्चे हैं, जबकि लगभग दस लाख महिलाओं और लड़कियों को जबरन विस्थापित किया गया है। मानवीय और सांख्यिकीय दृष्टिकोण से रिपोर्ट आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में आई गंभीर गिरावट को रेखांकित करती है।
राजदूत ने रिपोर्ट के हवाले से बताया कि 90 प्रतिशत से अधिक आबादी गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रही है, जिनमें महिलाएं और बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हैं। स्वच्छ पानी और स्वच्छता सुविधाओं तक पहुंच में भारी कमी आई है, जिससे पहले से ही दयनीय जीवन परिस्थितियां और भी बदतर हो गई हैं। रिपोर्ट में महिलाओं पर पड़ने वाले भारी मनोवैज्ञानिक प्रभाव का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें व्यापक आघात और चिंता शामिल है, और कई महिलाएं परिवार के सदस्यों की मृत्यु या चोट के बाद एकमात्र देखभालकर्ता बनने के लिए मजबूर हैं।
उन्होंने कहा कि चिंताजनक आंकड़े न केवल तात्कालिक मानवीय संकट को दर्शाते हैं, बल्कि दूरगामी सामाजिक परिणामों के खतरे को भी उजागर करते हैं। स्थिति के लिए तत्काल अंतरराष्ट्रीय ध्यान और ठोस उपायों की आवश्यकता है ताकि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के अनुसार नागरिकों, विशेष रूप से महिलाओं की सुरक्षा की जा सके।
इस मौके पर पूर्व विधायक अफ़रोज़ अली खां, बाबर अली खां, मौलाना अंसार रजा, मौलाना असलम जावेद क़ासमी, अदनान ज़ियाई, काशिफ खां, मौलाना शाह खालिद खान, धर्मेंद्र देव गुप्ता, मौलाना मूसा रजा, आतिफ़ रज़ा खां, मौलाना ज़मा बाकरी, राजा खां, फिरोज सज्जाद खां, तनवीर भैया, इमरान अजीज, रफ़ी खान, शाहरुख़, हाजी नाजिश खां, अज़हर खान, अहतेशाम सहरी, अकबर खां, अब्दुल जब्बार खां, जीशन रजा खां आदि मौजूद रहे।