कोई भी संगठन एक व्यक्ति से नहीं चलता। राष्ट्रीय अध्यक्ष दिशा, नेतृत्व और दृष्टि देते हैं, लेकिन संगठन को मजबूत बनाने, कार्यक्रम चलाने, आर्थिक सहयोग देने और जमीन पर काम करने की जिम्मेदारी हर पदाधिकारी और कार्यकर्ता की होती है।
अगर सारी जिम्मेदारी सिर्फ एक व्यक्ति पर छोड़ दी जाए, तो: संगठन कमजोर पड़ता है कार्यों की गति धीमी हो जाती है और असंतुलन पैदा होता है
एक मजबूत संगठन में: राष्ट्रीय कार्यकारिणी नीति और सहयोग देती है प्रदेश/जिला स्तर के पदाधिकारी क्रियान्वयन करते हैं कार्यकर्ता जमीन पर काम करते हैं और सभी मिलकर आर्थिक व संगठनात्मक जिम्मेदारी निभाते हैं