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  • Stone pelting on delegation in Ghazipur and instead filing case against SP leaders is proof of dictatorship.

गाज़ीपुर में प्रतिनिधिमंडल पर पथराव व उल्टे सपा नेताओं पर मुकदमा तानाशाही का प्रमाण

लखनऊ/अयोध्या।फतेहपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद नरेश उत्तम पटेल के कानपुर स्थित निजी आवास पर 17 अप्रैल 2026 को भाजपा के कुछ अराजक लोगों द्वारा हंगामा करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि दर्जनों लोगों ने अचानक पहुंचकर गाली-गलौज की, घर पर लगे पोस्टर और बैनर फाड़ दिए तथा नाम पट्टीका पर जूते-चप्पल मारकर अभद्र व्यवहार किया। 

घटना के समय सांसद घर पर मौजूद नहीं थे, जबकि उनके परिवार के सदस्य मौजूद थे।इस घटना को लेकर समाजवादी पार्टी से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाएं न सिर्फ जनप्रतिनिधि का अपमान हैं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक सौहार्द पर भी सीधा आघात हैं। आज जिलाधिकारी के प्रतिनिधि नगर उपजिलाधिकारी को ज्ञापन देकर सांसद को वाई श्रेणी की सुरक्षा उपलब्ध कराने और दोषियों पर सख्त कार्यवाही की मांग की गयी।

प्रतिनिधि मंडल में शामिल गौशाईगंज प्रभारी चौ. लौटन राम निषाद ने कहा कि भाजपा हर मामले में राजनीतिक लाभ की तलाश करती है। उन्होंने कहा कि ज़ब विधायिका (लोकसभा व विधानसभा ) में महिला आरक्षण बिल 22 सितंबर 2022 को पास हो गया तो महिलाओं मौजूदा 543 सीटों में कोटा क्यों नहीं देती, भाजपा महिला सम्मान व सशक्तिकरण के नाम पर सिर्फ नाटकबाजी करती है। एनडीए की 22 राज्यों में सरकार है, यदि वह महिला हितैषी है तो 7-8 महिला मुख्यमंत्री बनाने से कौन रोकता है, लोकसभा, विधानसभा व उच्च सदन में 33% प्रतिनिधित्व क्यों नहीं दे रही? उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव 2024 में उत्तर प्रदेश की 80 में कितनी महिलाओं को टिकट दी। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी महिला प्रतिनिधित्व की समर्थक है लेकिन उसमें ओबीसी, एससी, एसटी के कोटा के बिना महिला आरक्षण सामाजिक न्याय के प्रतिकूल है।

 प्रतिनिधि मंडल के द्वारा बताया गया कि हाल ही में गाजीपुर जनपद के करंडा थाना अन्तर्गत कटरिया गाँव में एक नाबालिग की हत्या के बाद सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के निर्देशानुसार संवेदना व्यक्त करने पहुंचे पार्टी प्रतिनिधिमंडल पर प्रधान प्रतिनिधि आशुतोष उर्फ़ आशू सिंह द्वारा ईंट पत्थर से पुलिस के सामने हमला कराया गया।लेकिन अराजक तत्वों के विरुद्ध कार्यवाही न कर 48 नामजद व 200 अज्ञात सपा पदाधिकारियों व नेताओं पर संगीन धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर पुलीसिया तांडव कराया जा रहा है।

इन दोनों घटनाओं को जोड़ते हुए नेताओं ने इसे सुनियोजित और दुर्भाग्यपूर्ण घटनाक्रम बताते हुए तानाशाही बताया है। प्रशासन से मांग की गई है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और त्वरित जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही सांसद और अन्य नेताओं की सुरक्षा बढ़ाने की भी अपील की गई है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। 

ज्ञापन देने वाले प्रतिनिधियों में सर्वश्री कृष्णकुमार पटेल, पूर्व चेयरमैन मयाराम वर्मा, मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड के राष्ट्रीय सचिव विजय बहादुर वर्मा, समाजवादी पिछड़ावर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव जगन्नाथ पाल, समाजवादी अधिवक्ता सभा के प्रदेश सचिव कापिंजल निषाद एडवोकेट, जिलाध्यक्ष रामकरन यादव एडवोकेट, समाजवादी छात्रसभा के जिलाध्यक्ष शुभम वर्मा, यूथ ब्रिगेड के जिलाध्यक्ष सोएब अहमद खान, राजेन्द्र वर्मा, अशोक वर्मा, रामकुमार निषाद, मायाराम यादव, शिवपाल पाल, पूर्व प्रमुख स्वामीनाथ वर्मा, श्रीचंद्र चौरसिया, अमृतलाल वर्मा, सुरेंद्र यादव, पंकज यादव एडवोकेट, संतोष वर्मा, जगजीवन पटेल, प्रेमचंद प्रजापति, देवराज वर्मा, शिवमंगल वर्मा व संयुक्त किसान मोर्चा, भारतीय किसान यूनियन व समाजवादी पार्टी के सैकड़ों पदाधिकारी व कार्यकर्त्ता शामिल रहे।