13 घंटे के रेस्क्यू के बाद भी प्रशासन खाली हाथ, परिजनों ने निकाला शव*

रात 11 बजे चचेरा भाई और फूफा कुएं में उतरे, एक घंटे की मशक्कत के बाद आधी रात को मिला रेहान का शव; 35 साल से खुला पड़ा था कुआं_ 

 *खखरेरू/फतेहपुर*  थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर 13 सरोजिनी नगर में खुले कुएं में गिरे 10 वर्षीय रेहान की मौत ने प्रशासनिक व्यवस्था और आपातकालीन बचाव इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 13 घंटे तक चले रेस्क्यू अभियान के बावजूद जब प्रशासनिक टीमें बच्चे को बाहर निकालने में सफल नहीं हो सकीं तो आखिरकार परिजनों ने खुद मोर्चा संभाला। रात करीब 11 बजे रेहान का चचेरा भाई नौशाद और फूफा नियाज अहमद कुएं में उतरे। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद दोनों ने आधी रात को रेहान का शव बाहर निकाला। सवाल यह है कि जब परिजन खुद जोखिम उठाकर कुएं में उतर रहे थे, तब मौके पर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी तथा उनकी भूमिका क्या थी शनिवार दोपहर करीब 12 बजे साबिर अली का 10 वर्षीय बेटा रेहान बारिश के कारण पैर फिसलने से करीब 80 फीट गहरे कुएं में गिर गया था। कुएं में लगभग 30 से 35 फीट पानी भरा होने के कारण बचाव अभियान में लगातार बाधाएं आती रहीं। सूचना पर पुलिस और राजस्व विभाग की टीम स्थानीय गोताखोरों के साथ मौके पर पहुंची। नगर पंचायत प्रशासन की मदद से कुएं का पानी निकालने के लिए समरसेबल पंप भी लगाए गए, लेकिन कई घंटे तक चले प्रयास के बावजूद बच्चे का पता नहीं चल सका  *अंतिम समय में परिजनों ने संभाली कमान* लगातार प्रयासों के बावजूद सफलता नहीं मिलने और बारिश की वजह से रेस्क्यू प्रभावित होने के बीच कौशांबी जनपद के पश्चिम शरीरा थाना क्षेत्र निवासी नियाज अहमद और रेहान के चचेरे भाई नौशाद ने कुएं में उतरने का फैसला किया। रात करीब 11 बजे दोनों कुएं में उतरे और काफी देर तक तलाश की। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद रेहान का शव बाहर निकाला गया। इसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

 *रात नौ बजे रेस्क्यू रोकने की बात, पुलिस की तैनाती पर सवाल* 

प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि रात करीब 10 बजे पुलिस और राजस्व विभाग की टीम मौके से लौट गई थी। क्षेत्रीय लेखपाल सुनील कुमार ने भी बताया कि तेज बारिश के कारण रात करीब 10 बजे रेस्क्यू स्थल से टीम वापस लौट आई थी। वहीं थाना प्रभारी सतपाल सिंह ने बताया कि बारिश और कुएं में अधिक पानी होने के कारण रात करीब नौ बजे रेस्क्यू अभियान रोक दिया गया था। सुरक्षा के मद्देनजर मौके पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी हालांकि, परिजनों द्वारा कुएं में उतरकर शव निकालने और उस दौरान मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों की भूमिका को लेकर पूछे गए सवालों पर थाना प्रभारी स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आए। ऐसे में रेस्क्यू रोकने के समय और मौके पर पुलिस की वास्तविक मौजूदगी को लेकर सवाल उठ रहे हैं  *35 साल से खुला पड़ा था मौत का कुआं*  बताया जाता है कि लाल मियां का यह कुआं करीब 35 वर्षों से खुला पड़ा था। बस्ती से महज 500 मीटर की दूरी पर स्थित इस कुएं को न तो ढका गया और न ही सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम किए गए। क्षेत्रीय लेखपाल सुनील कुमार के मुताबिक, उन्होंने खुले कुएं के संबंध में नगर पंचायत प्रशासन को मौखिक जानकारी दी थी। इसके बावजूद कुएं को सुरक्षित कराने की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। हादसे के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि सूचना मिलने के बावजूद जिम्मेदार विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की  *मां की उम्मीद टूटी, पिता की आंखों से छलके आंसू* 

रेहान की मां मदीना बेगम ने बताया कि शनिवार सुबह करीब आठ बजे बेटा घर से स्कूल खुला है या बंद, इसकी जानकारी करने की बात कहकर निकला था। उसकी अर्धवार्षिक परीक्षाएं चल रही थीं। करीब 11 बजे परिवार को उसके कुएं में गिरने की सूचना मिली। इसके बाद से मां और बड़ा भाई कैयान घटनास्थल पर डटे रहे। बेटे की मौत की खबर मिलते ही मां बेसुध हो गई। आसपास की महिलाएं उसे संभालती रहीं, वहीं बीमारी के चलते कमजोर पिता साबिर अली बेटे को खोने के गम में आंसू बहाते रहे  *बड़ा सवाल : सूचना के बावजूद कुआं सुरक्षित क्यों नहीं कराया गया?*   करीब 35 साल से खुला पड़ा कुआं , नगर पंचायत को मौखिक सूचना देने का दावा और हादसे के बाद घंटों चला बचाव अभियान। इन सबके बीच आखिरकार परिजनों को खुद कुएं में उतरकर बच्चे का शव निकालना पड़ा। अब सवाल है कि खुले कुएं को सुरक्षित कराने में लापरवाही किस स्तर पर हुई? रेस्क्यू अभियान रोकने के बाद मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों की भूमिका क्या रही? क्या इस दर्दनाक हादसे के बाद जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होगी या मामला जांच और आश्वासनों तक ही सीमित रह जा