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  • Allegations of a "swing of death" being created at the Ramnagar exhibition, locals' protest intensifies.

रामनगर प्रदर्शनी में “मौत का झूला” बनने का आरोप, स्थानीय लोगों का विरोध तेज।

पांच वर्ष पूर्व झूला गिरने से हो चुकी है एक बालक की मौत, प्रशासन की अनुमति पर उठे सवाल।

रामनगर (वाराणसी)। रामनगर थाना क्षेत्र के पंचवटी रामलीला मैदान और किला रोड स्थित अयोध्या मैदान में प्रस्तावित प्रदर्शनी मेले को लेकर स्थानीय लोगों का विरोध तेज हो गया है। खासतौर पर मेले में लगाए जाने वाले बड़े झूले को लेकर लोगों में नाराजगी है, जिसे वे “मौत का झूला” करार दे रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि करीब पांच वर्ष पहले, वर्ष 2020 में साहित्य नाका मोड़ के पास सेंट स्टीफेंस स्कूल के बगल में लगे इसी प्रकार के प्रदर्शनी मेले में बड़ा झूला टूटकर गिर गया था, जिसमें एक मासूम बच्चे की दर्दनाक मौत हो गई थी। उस घटना के बाद भारी हंगामा हुआ था और प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन भीटी चौकी इंचार्ज को लाइन हाजिर किया गया था। इसी तरह की एक अन्य दुर्घटना रामनगर के संगत मैदान में भी सामने आ चुकी है।

अब एक बार फिर उसी तरह के बड़े झूले लगाए जाने की तैयारी से स्थानीय लोग चिंतित हैं। सूत्रों के अनुसार, अभी तक इन दोनों स्थलों—पंचवटी रामलीला मैदान और अयोध्या मैदान—के लिए जिला प्रशासन से औपचारिक अनुमति जारी नहीं हुई है, बावजूद इसके मेले की तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं और एक-दो दिनों में शुभारंभ की संभावना जताई जा रही है।

लोगों ने यह भी सवाल उठाया है कि काशी नरेश की संपत्ति मानी जाने वाली रामलीला भूमि पर प्रदर्शनी की अनुमति किन आधारों पर दी जा रही है। साथ ही, किला रोड पर रोजाना ठेले-खोमचे के कारण लगने वाले जाम की समस्या को भी मुद्दा बनाया गया है। नागरिकों का सुझाव है कि यदि दुर्ग प्रशासन प्रदर्शनी के लिए स्थान किराए पर दे सकता है, तो उसी आधार पर ठेला विक्रेताओं को अयोध्या मैदान में व्यवस्थित स्थान दिया जाए, जिससे यातायात की समस्या कम हो सके।

इस मुद्दे पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महानगर उपाध्यक्ष सरदार सतनाम सिंह ने भी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि मेले और झूले बच्चों के मनोरंजन के लिए होते हैं, लेकिन पूर्व में हो चुकी दुर्घटनाओं को देखते हुए सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि किसी भी झूले को अनुमति देने से पहले उसकी तकनीकी जांच और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बिना जांच के इस प्रकार के “खतरनाक झूलों” को अनुमति दी जाती है, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। फिलहाल, मेले को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं, लेकिन सुरक्षा और अनुमति से जुड़े सवालों के बीच प्रशासन की भूमिका पर सभी की