वाराणसी। काशी को कैमरे में कैद करना केवल तकनीक नहीं, बल्कि संवेदनशील दृष्टिकोण का विषय है। यह बात प्रख्यात फोटोग्राफर मनीष खत्री ने मड़ौली स्थित मेहता आर्ट गैलरी में ‘कोरस–2026’ के तहत आयोजित सोशल मीडिया कार्यशाला में कही। उन्होंने कहा कि अच्छी तस्वीर तकनीक से बनती है, लेकिन महान तस्वीर संवेदना से।
उन्होंने काशी की बदलती रोशनी, घाटों के दृश्य और जीवन-मृत्यु के दर्शन को समझते हुए फोटोग्राफी करने पर जोर दिया। साथ ही कैमरा सेटिंग्स, फ्रेमिंग और प्राकृतिक रोशनी के उपयोग के टिप्स भी दिए। आकाशवाणी के पूर्व उद्घोषक अशोक आनंद ने कहा कि आवाज के जरिए भी तस्वीर बनाई जा सकती है, इसलिए बोलते समय स्पष्टता, उतार-चढ़ाव और आत्मीयता जरूरी है। वहीं डॉ. प्रभाशंकर मिश्र ने “बोलना” और “अपनी बात कहना” के अंतर को समझाया। डॉ. अरविंद कुमार सिंह, वरिष्ठ पत्रकार विजय विनीत और डॉ. लेनिन रघुवंशी ने भी सोशल मीडिया पर प्रभावी संवाद, अभ्यास और संतुलित प्रस्तुति के महत्व पर प्रकाश डाला।