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  • By sending a letter on the Chief Minister's e-mail portal, he reminded them of his own announcement.

मुख्यमंत्री के ई मेल पोर्टल पर पत्र भेज कर उनकी ही घोषणा की याद दिलाई

लखनऊ। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष जे एन तिवारी ने आज मुख्यमंत्री के आधिकारिक ई मेल आईडी पर एक पत्र प्रेषित करते हुए प्रदेश में कार्यरत आशा बहुओं ,संगिनी एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों को बढ़ा हुआ मानदेय तत्काल देने की मांग किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री को भेजे अपने ज्ञापन में  मुख्यमंत्री जी से सदन में किए गए उनकी घोषणा की याद दिलाते हुए आशा बहुओं के लिए 18000 रुपए का न्यूनतम मानदेय निश्चित किए जाने की मांग किया है।

जे एन तिवारी ने अवगत कराया है कि महिला सशक्तिकरण के दौर में आशा बहुएं समाज में उपेक्षित जीवन जी रही है। उनको दो से ढाई हजार तक मानदेय मिल रहा है जिसमें उनका घर चलना मुश्किल है। आशा बहुओं से सभी कार्य लिए जा रहे हैं। 

जनगणना से लेकर वोटर लिस्ट तक में आशा  बहुएं लगाई जा रही है। चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग में गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण, संस्थागत प्रसव कराने एवं बच्चों के टीकाकरण से लेकर  फाइलेरिया, टी बी के मरीजों की खोज करना भी आशाओं की जिम्मेदारी है। ऐसे सैकड़ो कार्य हैं जो आशाएं कर रही हैं लेकिन उनको इन कार्यों के लिए कोई प्रोत्साहन राशि या मानदेय नहीं दिया जा रहा है। 

विगत दो माह से आशाओं को एक पैसा भी नहीं मिला है जिसके कारण ज्यादातर आशाओं के घरों में चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है। संयुक्त परिषद की महामंत्री अरुणा शुक्ला ने मुख्यमंत्री जी से अपील किया है कि महिला सशक्तिकरण का सही मायने महिलाओं को वास्तविक रूप से सशक्त करने में ही है। विभिन्न सरकारी विभागों में महिलाओं पर अत्याचार हो रहे हैं विशेष कर आशाओं एवं महिला संविदा कर्मियों की दशा दयनीय है। 

आशाओं के लिए उन्होंने मानदेय निश्चित किए जाने तथा समाज में सम्मान दिलाए जाने की बात भी किया है। संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी ने कहा है कि आशाएं अपनी उपेक्षा से सरकार से नाराज है। आशाओं की जड़े बहुत मजबूत है। आशाएं  ग्राम सभा के प्रत्येक घर में महिलाओं के संपर्क में है। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद से जुड़ी प्रदेश की आशाएं परिषद के किसी भी आवाहन पर आर पार का संघर्ष करने को तैयार है।

संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी ने आशा हेल्थ वर्कर्स एसोसिएशन की अध्यक्ष कुसुम लता को आश्वस्त किया है कि  प्रदेश के मुख्यमंत्री  शीघ्र ही आशाओं का मानदेय निश्चित करेंगे। यदि अप्रैल में आशाओं के मानदेय पर निर्णय नहीं लिया गया तो आशाएं जनपदों में आंदोलन भी कर सकती हैं। चुनावी वर्ष है। ऐसे में प्रदेश की 239000 आशाओं को नाराज करना सरकार के लिए भारी भी पड़ सकता है।