लखनऊ। इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के भाषा विभाग द्वारा 29–30 अप्रैल 2026 को “रीइमैजिनिंग इंडिया एंड बियॉन्ड: नैरेटिव्स ऑफ बिलॉन्गिंग, डाइवर्सिटी एंड कोएग्ज़िस्टेंस इन लिटरेचर एंड सिनेमा” शीर्षक से दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में देशभर से प्रतिष्ठित विद्वानों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं रचनात्मक पेशेवरों ने हाइब्रिड प्रारूप में भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान साहित्य, सिनेमा, सांस्कृतिक अध्ययन तथा अनुवाद अध्ययन जैसे अंतःविषय क्षेत्रों के माध्यम से पहचान, बहुलता और सांस्कृतिक सहअस्तित्व की उभरती कथाओं पर गंभीर विमर्श किया गया।
इस अवसर पर माननीय कुलाधिपति प्रो. सैयद वसीम अख्तर की गरिमामयी उपस्थिति एवं आशीर्वाद प्राप्त हुआ। उन्होंने आयोजकों को बधाई देते हुए संवाद, समावेशिता और सांस्कृतिक समझ को प्रोत्साहित करने में साहित्य एवं सिनेमा की परिवर्तनकारी भूमिका को रेखांकित किया। अन्य विशिष्ट शिक्षाविदों में माननीय कुलपति प्रो. फुरकान क़मर, प्रो. मोहम्मद मुबीन तथा प्रो. सुरेश कुमार शर्मा ने भी अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम का शुभारंभ भाषा विभागाध्यक्ष प्रो. एच. एम. आरिफ के औपचारिक स्वागत से हुआ, जिसके पश्चात डॉ. अर्शी खान ने उद्घाटन संबोधन प्रस्तुत किया। प्रमुख वक्ताओं में प्रो. मीनाक्षी पाहवा, प्रो. आसिम सिद्दीकी, प्रो. समी रफीक, प्रो. आरती निर्मल एवं प्रो. हुमा याक़ूब शामिल रहे। उन्होंने कथानक संरचनाओं, सिनेमाई अभिव्यक्ति तथा साहित्य और फिल्म के अंतर्संबंधों पर अपने विचार प्रस्तुत कर चर्चा को समृद्ध बनाया। कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण स्नातकोत्तर छात्रों द्वारा प्रस्तुत ऑडियो-विज़ुअल प्रस्तुति रही, जिसमें वैश्विक सिनेमा के प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई और विचार-विमर्श के लिए एक सशक्त वातावरण निर्मित हुआ।
विभिन्न तकनीकी सत्रों में अनेक शोधपत्र प्रस्तुत किए गए, जिनमें साहित्य और सिनेमा अध्ययन के विविध आयामों को रेखांकित किया गया। इन सत्रों ने समावेशिता, संवाद और शैक्षणिक सहभागिता की भावना को और सुदृढ़ किया। उत्कृष्ट प्रस्तुतियों के लिए नफीसा नाज़, एहसानुल हक़ एवं मंताशा खातून को सम्मानित किया गया। सम्मेलन का समापन एक सजीव समापन सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिष्ठित शिक्षाविदों के प्रेरक संदेश प्रस्तुत किए गए।
सत्रों का संचालन डॉ. अर्शी खान, डॉ. जेबा रिज़वी तथा मोहम्मद अदील द्वारा किया गया, जिन्हें संकाय सदस्यों एवं छात्र समन्वयकों का पूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ। यह पहल सतत विकास लक्ष्यों—गुणवत्तापूर्ण शिक्षा (एसडीजी 4), लैंगिक समानता (एसडीजी 5) तथा शांति, न्याय और सशक्त संस्थान (एसडीजी 16)—के अनुरूप रही, जिसमें सौहार्द, सहिष्णुता एवं अंतरसांस्कृतिक संवाद को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया गया।