हिन्दू महासभा ने बौद्ध पंथ को सनातन धर्म का अविभाज्य अंग और गौरव बताया - बी एन तिवारी

 अखिल भारत हिन्दू महासभा ने भगवान बुद्ध जयंती और श्रमिक दिवस पर समस्त देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए उनसे महात्मा बुद्ध के उपदेशों और शिक्षाओं को आत्मसात करते हुए भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने का आह्वान किया। राष्ट्रीय अध्यक्ष रविन्द्र कुमार द्विवेदी ने कहा कि भगवान बुद्ध भगवान विष्णु के नवें अवतार के रूप में महाराजा शुद्धोधन के पुत्र के रूप क्षत्रिय जाति में पृथ्वी पर मानवता और जीव कल्याण के लिए अवतरित हुए थे। भगवान बुद्ध ने  बौद्ध पंथ की स्थापना कर सत्य, अहिंसा और प्रेम का संदेश दिया। भगवान बुद्ध का यह संदेश आज भी प्रासंगिक है और मानव जाति के कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।

हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता बी एन तिवारी ने आज जारी बयान में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भगवान बुद्ध ने तत्कालीन समाज में व्याप्त कुरीतियों और अमानवीय नीतियों के निवारण हेतु बौद्ध पंथ की स्थापना की थी। उनके अनुसार हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविन्द्र कुमार द्विवेदी ने कहा कि वर्तमान समय में बौद्ध पंथ के अंदर नवबौद्ध संस्कृति के नाम से एक नया वर्ग उभर रहा है, जो बौद्ध पंथ को बौद्ध धर्म के रूप में मान्यता देते हुए बौद्ध पंथ को सनातन धर्म के विरोधी पंथ के रूप में स्थापित करने का दुष्प्रयास कर रहा है। कांग्रेस और वामपंथ की राजनीतिक विचारधारा से प्रेरित नवबौद्ध संस्कृति  सनातन धर्म को समाप्त करने का प्रयास कर रही हैं, जबकि वास्तव में बौद्ध पंथ सनातन धर्म का अविभाज्य अंग  और सनातन धर्म का गौरव है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक सनातनी भगवान बुद्ध को विष्णु भगवान के नवें अवतार के रूप में मान्यता देता है और उनकी उपासना करता है । इसके विपरीत नवबौद्ध संस्कृति के अनुयायियों ने सनातन धर्म के देवी देवताओं के विरुद्ध दुष्प्रचार करना और उन्हें अपमानित करना ही अपना परम धर्म स्वीकार कर लिया है। ऐसे नवबौद्ध वास्तव में भगवान बुद्ध की नीतियों, शिक्षाओं और आदर्शों के विरुद्ध आचरण कर रहे हैं। उनका यह आचरण उनका अक्षम्य अपराध है।

राष्ट्रीय प्रवक्ता बी एन तिवारी ने बताया कि सनातन धर्म बौद्ध पंथ की जननी है और अपनी जननी के विरुद्ध विषवमन को किसी भी दृष्टि से उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने सनातन धर्म के विरुद्ध विषवमन करने वाले नवबौद्धों को भगवान बुद्ध से सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की। उन्होंने बताया कि हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रोफेसर यशपाल सिंह ने देशवासियों को श्रमिक दिवस पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए " श्रमेव जयते " का नारा दिया। उन्होंने कहा कि भारत के श्रमिकों की आर्थिक एवं सामाजिक उन्नति के बिना भारत को पुनः विश्वगुरु बनाना दिवास्वप्न देखने के समान है।

प्रोफेसर यशपाल सिंह ने कहा कि श्रम एक ऐसी पूंजी है, जिसके विस्तार और सशक्तिकरण से राष्ट्र और समाज का कल्याण और उन्नति संभव है। उन्होंने कहा कि भारत में श्रमिक समाज, विशेषकर महिला श्रमिकों की दशा और दिशा निर्धारित करने के लिए आज भी बहुत कुछ किया जाना शेष है।  निजी क्षेत्रों से जुड़े श्रमिकों और असंगठित कामगारों की आर्थिक और सामाजिक दशा स्वतंत्रता प्राप्ति के 79 वर्ष बाद भी शोचनीय बनी हुई है। उन्हें भारत सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी तक नहीं मिल पाती। श्रमिकों की समस्याओं के समाधान और उनकी आर्थिक उन्नति और समृद्धि के लिए देश में अनेक कानून विद्यमान हैं, किंतु उन कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं कर पाना और पूंजीवादी व्यवस्था के सामने श्रम कानूनों का निष्प्रभावी होना अपने आप में एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने भारतr सरकार को श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी 25 हजार रूपए प्रतिमाह निर्धारित कर भारतीय श्रमिकों को आर्थिक उन्नति और आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़ने का परामर्श दिया है।