राहुल गांधी, कार्यकर्ताओं की आवाज सुनिए

जमीन से जु्डे समर्पित कांग्रेस कार्यकर्ता  सवाल पूुछने को मजबूर हैं: क्योंकि लगातार उन्हें अनसुना और अनदेखा किया जा रहा है। क्या राहुल गांधी के पास वाकई में कठोर और बड़े फैसले लेने की राजनीतिक इच्छाशक्ति है, या फिर संगठन सिर्फ बयानबाजी और दिखावे तक सीमित रह जाएगा..??

उत्तर प्रदेश कांग्रेस की हालत किसी से छिपी नहीं है जमीनी स्तर पर कार्यकर्ता संघार्ष कर रहा है, लेकिन ऊपर बैठा नेतृत्व आत्ममंथन करने को तैयार नहीं दिख रहा अजय राय की अगुवाई में संगठन आखिर किस दिशा में जा रहा है...?  व्या यही रणनीति है जिससे कांग्रेस को दोबारा खडा किया जाएगा..?और सवाल सिर्फ प्रदेश अध्यक्ष तक सीमित नहीं है...अबिनाश पाण्डेय और धीरज गुर्जर जैसे जिमेदार पदों पर बैठे लोगों की भूमिका पर भीअब खुलकर चर्चा हो रही है क्या संगठन में जवाबदेही नाम की कोई चीज बची है या नहीं...?

27 मई जब देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू जी की पुण्यतिथि होगी वह सिर्फ एक श्रट्दांजलि का दिन होगा, या कांग्रेस के लिए आत्ममंथन का दिन भी होगा। देखना ये है कि उस दिन तक नेतृत्व कोई बडा और सख्त फैसला लेता है या एक बार फिर कार्यकर्ताओं की आवाज़ को अनसुना और अनदेखा कर दिया जाएगा। कार्यकर्ता अब चुप नहीं रहेगा सवाल अब दबाए नहीं जाएंगे जवाब  देना ही पड़ेगा!

अगर संगठन को बचाना है तो “कठोर फैसले" लेने ही होंगे... वरना इतिहास गवाह है, जो पार्टी अपने कार्यकर्ताओं की आवाज़ नहीं सुनती, वह धीरे-धीरे खुद ही खत्म हो जाती है!