वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के भारत अध्ययन केंद्र स्थित मानवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र के महामना सभागार में तीन दिवसीय ‘इंडियन कल्चरल इनोवेशन्स कॉन्क्लेव 2026’ का शुभारंभ हुआ। अशोका इंस्टीट्यूट, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय एवं सहयोगी संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे मातरम्, मंगलाचरण, बीएचयू कुलगीत और दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। श्रेयसी मिश्रा ने गणेश वंदना पर कत्थक तथा श्रेयश के. बी. ने यक्षगान प्रस्तुत कियामुख्य अतिथि पद्मश्री अनिल कुमार रस्तोगी ने कहा कि रंगमंच व्यक्ति के व्यक्तित्व, अभिव्यक्ति और नेतृत्व क्षमता को निखारता है तथा टीम भावना विकसित करता है। मुख्य वक्ता अभिनेता संजय मिश्रा ने कहा कि भाषा और शहर समय के साथ बदलते हैं, लेकिन बनारस की अपनी विशिष्ट भाषा और संस्कृति है। उन्होंने युवाओं से वर्तमान में सजगता के साथ जीवन जीने का आह्वान किया विशिष्ट वक्ता लेखिका डॉ. नीरजा माधव ने कहा कि भाषाई स्वाभिमान की लड़ाई अपनी भाषा को अधिक से अधिक बोलकर ही जीती जा सकती है। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. हरिकेश सिंह ने भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा को समझने के लिए भारतीय अंतर्दृष्टि को आवश्यक बताया आयोजन समन्वयक प्रो. शरर्देंदु कुमार तिवारी ने स्वागत किया। संयोजक डॉ. अपर्णा सिंह ने आभार जताया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अमित कुमार पाण्डेय ने किया। समारोह में यश कुमार जैन, कौशिव अग्रवाल, धवल प्रकाश, अंशुमान, अपूर्व तिवारी, स्वाति मित्तल, डॉ. स्वर्ण सुमन, डॉ. प्रीति और एआईटीएम की निदेशक डॉ. सारिका श्रीवास्तव सहित विभिन्न क्षेत्रों के विशिष्टजन, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे। कॉन्क्लेव 16 सितंबर तक चलेगा।