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  • On the seventh day of the Ram Katha, the audience was moved to emotion upon hearing the episodes of the *Kevat Samvad* (dialogue with the boatman) and *Bharat Milap* (reunion with Bharat).

राम कथा के सातवें दिन केवट संवाद और भारत मिलाप प्रसंग सुनकर भावुक हुए श्रोता-

लखनऊ। पद्मविभूषण तुलसीपीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने श्रीराम कथा के सप्तम दिवस केवट प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि हमारे वेदों, इतिहास, पुराणों और श्रुतियों में कहीं भी ऊंच-नीच की भावना नहीं है। भारतीय संस्कृति में जिसके हृदय में राम नहीं हैं वह छोटा है और जिसके हृदय में राम हैं वही बड़ा है।

सीतापुर रोड स्थित बृज की रसोई परिसर में चल रही श्रीराम कथा में उन्होंने कहा कि राम नाम की महिमा ही ऐसी है की इसे असुरों का भी उद्धार हुआ। भक्ति मुक्ति से बड़ी होती है।उन्होंने लखनऊ की टीले वाली मस्जिद का जिक्र करते हुए कहा कि लखनऊ को भगवान लक्ष्मण ने बसाया था। भारत बाबर और अकबर का नहीं राम का देश है। यहां रहना है तो वंदे मातरम बोलना पड़ेगा और राष्ट्रगान गाना पड़ेगा। यहां तुष्टिकरण कि नहीं बल्कि पुष्टिकरण की बात की जानी चाहिए।


कथा के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, वरिष्ठ भाजपा नेता नीरज सिंह, भाजपा प्रदेश कार्यालय प्रभारी भारत दीक्षित, यूपी पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य लक्ष्मण चौधरी, न्यायमूर्ति अनिल कुमार, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रांशु अग्रवाल, आंजनेय पीठाधीश्वर स्वामी रामानुजाचार्य सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने व्यासपीठ का आशीर्वाद प्राप्त किया।

कथा आरंभ होने से पूर्व विधायक डा. नीरज बोरा ने व्यवस्था से जुड़े सभी कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया श्री राम कथा के सातवें दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के साथ विधान परिषद सदस्य रामचंद्र प्रधान, विधायक अमरेश कुमार, जिला पंचायत बाराबंकी की अध्यक्ष राजरानी रावत, अंजनी श्रीवास्तव, राहुल राज रस्तोगी आदि उपस्थित थे।