रामपुर उत्तर प्रदेश रामपुर हिंदू सनातन धर्म ज्ञान की देवी त्रीपुश त्रिपुरेश्वरी शक्तिपीठ शक्तिपुरम कॉलोनी डायमंड सामने शक्तिपुरम की अध्यक्ष की साध्वी डॉक्टर प्रियंका शुक्ला के शुभ विचार संसार को छोड़ने से पहले यदि मन छूट जाए, तो फिर छोड़ने के लिए कुछ भी शेष नहीं रहता। यह पंक्ति उसी वैराग्य, आत्मबोध और गहरे आध्यात्मिक रहस्य को उजागर करती है कि मनुष्य का सबसे बड़ा बंधन बाहरी संसार नहीं, बल्कि उसका अपना मन है।
जब मन मोह, माया, अहंकार, इच्छाओं और आसक्तियों से मुक्त होने लगता है, तब संसार के बंधन भी स्वतः ढीले पड़ने लगते हैं। त्याग का वास्तविक अर्थ वस्तुओं का परित्याग नहीं, बल्कि उनसे जुड़ी मानसिक आसक्ति का अंत है जब मन शांत, निर्मल और बंधनों से रहित हो जाता है, तभी मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप का अनुभव करता है। तब वह स्वयं को केवल शरीर या सांसारिक पहचान तक सीमित नहीं मानता, बल्कि अपने भीतर स्थित आत्मा और परम सत्य का साक्षात्कार करता है।
यही अवस्था सच्ची मुक्ति, आत्मबोध और परम शांति की ओर ले जाती है। इसी कारण इस पंक्ति का भाव संत परंपरा, विशेषकर कबीर और सूफी संतों की आध्यात्मिक विचारधारा से अत्यंत निकट माना जाता है, जहाँ बाहरी त्याग से अधिक मन के त्याग को ही ईश्वर की प्राप्ति का वास्तविक मार्ग बताया गया है।