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यूपी रियल एस्टेट सेक्टर बना निवेश का नया केंद्र, आईसीसी यूपी रियल एस्टेट समिट 2026 में इंफ्रास्ट्रक्चर और शहरी विकास पर मंथन


उत्तर प्रदेश का रियल एस्टेट सेक्टर अब मजबूत विकास के दौर में यूपी रेरा चेयरमैन संजय आर. भूसरेड्डी आईसीसी यूपी रियल एस्टेट समिट 2026 में उत्तर प्रदेश को भारत के अगले बड़े निवेश और रियल एस्टेट ग्रोथ इंजन के रूप में बताया गया

लखनऊ- इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईसीसी) ने ताज महल,लखनऊ में आईसीसी यूपी रियल एस्टेट समिट 2026 का आयोजन किया। इस समिट में नीति निर्माता, रेगुलेटरी संस्थाएं, डेवलपर्स, निवेशक, कंसल्टेंट्स और इंडस्ट्री से जुड़े कई विशेषज्ञ शामिल हुए। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के बदलते रियल एस्टेट परिदृश्य और राज्य को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में रियल एस्टेट सेक्टर की भूमिका पर चर्चा की गई।


समिट के दौरान इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित विकास, उभरते शहरों में बढ़ती हाउसिंग डिमांड, रेगुलेटरी सुधार, टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल और कमर्शियल व को-वर्किंग स्पेस के भविष्य जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। पूरे दिन चले इस सम्मेलन में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, रियल एस्टेट डेवलपर्स, शहरी योजनाकार और उद्योग विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। सभी ने इस बात पर जोर दिया कि उत्तर प्रदेश तेजी से देश के सबसे महत्वपूर्ण निवेश और शहरी विकास केंद्रों में शामिल होता जा रहा है।

कार्यक्रम की शुरुआत इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के डायरेक्टर जनरल डॉ. राजीव सिंह के स्वागत भाषण से हुई। इसके बाद यूपी रेरा के चेयरमैन संजय आर. भूसरेड्डी ने थीम एड्रेस दिया। एनारॉक ग्रुप के चेयरमैन और फाउंडर अनुज पुरी ने मुख्य वक्तव्य प्रस्तुत किया, जबकि उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी ने बतौर मुख्य अतिथि अपने विचार रखे।

समिट में उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट बाजार को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख विषयों पर चार विशेष सत्र आयोजित किए गए। इंफ्रास्ट्रक्चर, नीतियों और शहरी विकास से यूपी के 1 ट्रिलियन डॉलर रियल एस्टेट विजन को मिलेगी रफ्तार:

इस सत्र में चर्चा की गई कि एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, नीति सुधार और तेजी से हो रहा शहरी विस्तार किस तरह उत्तर प्रदेश को बड़े निवेश केंद्र में बदल रहे हैं। अफोर्डेबल से एस्पिरेशनल हाउसिंग तक, उत्तर प्रदेश की बढ़ती आवास जरूरतें:

इस चर्चा में हाउसिंग डिमांड और वैल्यू क्रिएशन के बीच संतुलन, टियर-2 और टियर-3 शहरों की बढ़ती भूमिका, पीएमएवाई आधारित विकास, रेरा के जरिए रेगुलेटरी पारदर्शिता और हाउसिंग सप्लाई में विविधता जैसे मुद्दों पर बात हुई।

एआई आधारित प्रॉपटेक,रियल एस्टेट सेक्टर में तकनीक का नया दौर: इस सत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल लैंड रिकॉर्ड, जीआईएस, बीआईएम, डेटा एनालिटिक्स और स्मार्ट बिल्डिंग जैसी तकनीकों के जरिए रियल एस्टेट सेक्टर में प्लानिंग, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और फैसले लेने की प्रक्रिया में हो रहे बदलावों पर चर्चा हुई।

नेक्स्ट जनरेशन के लिए नए दौर के को-वर्किंग स्पेस: इस चर्चा में हाइब्रिड वर्क कल्चर, एआई आधारित ऑफिस अनुभव, ईएसजी आधारित ऑफिस डेवलपमेंट, जीसीसी की बढ़ती मांग और कम्युनिटी आधारित को-वर्किंग स्पेस के बढ़ते महत्व पर विचार साझा किए गए।

समिट में इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के डायरेक्टर जनरल राजीव कुमार सिंह ने कहा, “उत्तर प्रदेश में अब विकास केवल एनसीआर तक सीमित नहीं रहा है। एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और बेहतर क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की वजह से राज्य के कई नए शहर और छोटे कस्बे विकास के नए केंद्र बनकर उभर रहे हैं। इससे रियल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट को एक साथ बड़ा अवसर मिल रहा है। बेहतर गवर्नेंस, निवेशकों का बढ़ता भरोसा, नीति में स्थिरता और पूंजी सुरक्षा की वजह से यह सेक्टर अब अधिक स्थिर और विकास केंद्रित चरण में पहुंच चुका है। आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश अभूतपूर्व शहरी और आर्थिक विस्तार देखने के लिए तैयार है।”

डॉ. बलकार सिंह ने कहा, “रियल एस्टेट और हाउसिंग किसी भी राज्य के आर्थिक विकास के सबसे मजबूत संकेतकों में से एक हैं और आज उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में यह बदलाव साफ दिखाई दे रहा है। बीते वर्षों में नीति सुधार, बेहतर कनेक्टिविटी, एक्सप्रेसवे नेटवर्क का विस्तार, एयरपोर्ट विकास और रेरा जैसी संस्थाओं की मजबूत भूमिका ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। एनसीआर पहले ही बड़ा हाउसिंग डेस्टिनेशन बन चुका है, लेकिन अब राज्य टियर-2 और टियर-3 शहरों में इंटीग्रेटेड टाउनशिप, नई हाउसिंग योजनाओं, इंडस्ट्रियल क्लस्टर और शहरी विस्तार के जरिए विकास को आगे बढ़ा रहा है। इसका उद्देश्य केवल घर बनाना नहीं, बल्कि रोजगार, शिक्षा, कमर्शियल डेवलपमेंट और बेहतर शहरी सुविधाओं के जरिए माइग्रेशन का दबाव कम करना भी है। जेवर एयरपोर्ट, रीजनल कैपिटल जोन, कन्वेंशन सेंटर और नए शहरी विकास मॉडल जैसे प्रोजेक्ट्स के साथ उत्तर प्रदेश संतुलित और विकेंद्रीकृत शहरी विकास के नए चरण में प्रवेश कर रहा है।”

यूपी रेरा के चेयरमैन संजय आर. भूसरेड्डी ने कहा, “2023 के अंत में बाजार में आई तेजी के बाद उत्तर प्रदेश का रियल एस्टेट सेक्टर अब मजबूत विकास के दौर में पहुंच चुका है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे जैसे एनसीआर माइक्रो मार्केट्स में प्रॉपर्टी की कीमतों में अच्छी बढ़ोतरी और निवेशकों का नया भरोसा देखने को मिला है। आज यूपी रेरा देश के सबसे बड़े रियल एस्टेट इकोसिस्टम में से एक की निगरानी कर रहा है, जहां 3,000 से ज्यादा प्रोजेक्ट रजिस्टर्ड हैं और हर साल निवेश लगातार बढ़ रहा है। केवल 2025 में ही प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन 3,000 के पार पहुंच गया, जबकि निवेश प्रतिबद्धताएं करीब 85,000 करोड़ रुपये तक पहुंचीं। आने वाले समय में यह आंकड़ा 1.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने का लक्ष्य है। संस्थागत निवेशकों और दक्षिण भारत के डेवलपर्स की बढ़ती भागीदारी भी उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट बाजार में बढ़ते राष्ट्रीय भरोसे को दिखाती है।”

समिट के दौरान हुई चर्चाओं में इस बात पर जोर दिया गया कि उत्तर प्रदेश अब केवल एनसीआर केंद्रित बाजार नहीं रह गया है, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, सरकारी नीतियों, संस्थागत निवेश और बढ़ती शहरी आकांक्षाओं की वजह से यह एक मल्टी-सिटी ग्रोथ मॉडल के रूप में उभर रहा है। इंडस्ट्री लीडर्स ने कहा कि आने वाले समय में राज्य का विकास केवल हाउसिंग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रेजिडेंशियल, कमर्शियल, इंडस्ट्रियल, टेक्नोलॉजी और सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर को साथ लेकर इंटीग्रेटेड अर्बन इकोसिस्टम तैयार किए जाएंगे।