लखनऊ: राष्ट्रीय सामाजिक कार्यकर्ता संगठन के संयोजक मोहम्मद आफाक ने अपने जारी बयान में मुख्यमंत्री के उस बयान का समर्थन किया जिसमें कहा गया है कि सड़कें आवागमन के लिए होती हैं और उन पर किसी भी धर्म या संगठन का कार्यक्रम नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारा संविधान सभी धर्मों को बराबरी का अधिकार देता है और हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह कानून, व्यवस्था और आम जनता की सुविधा का ध्यान रखे।
मोहम्मद आफाक ने कहा कि देश में आए दिन विभिन्न धार्मिक, राजनीतिक और सामाजिक जुलूस एवं कार्यक्रम सड़कों पर आयोजित किए जाते हैं, जिससे आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ट्रैफिक जाम होने की स्थिति में छात्र, कर्मचारी, मरीज और आम नागरिक प्रभावित होते हैं। कई बार आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस भी समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाती, जिसके कारण लोगों की जान तक चली जाती है।
उन्होंने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और राष्ट्रपति से मांग की कि देशभर में सड़कों पर होने वाले अनावश्यक जुलूसों और कार्यक्रमों के लिए सख्त एवं स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाए जाएं, ताकि आम जनता को राहत मिल सके और यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि इबादतगाहें पूजा-अर्चना के लिए हैं और सड़कें जनता की सुविधा एवं आवागमन के लिए, इसलिए हर व्यक्ति को जिम्मेदारी का परिचय देना चाहिए।
मोहम्मद आफाक ने आगे कहा कि धर्म इंसानियत, शांति, भाईचारे और अनुशासन का संदेश देता है। यदि किसी धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रम से आम जनजीवन प्रभावित होता है, तो उस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे कानून का सम्मान करें और प्रशासन का सहयोग करें, ताकि शहर में शांति एवं कानून व्यवस्था बनी रहे।
अंत में उन्होंने विशेष रूप से मुसलमानों से अपील की कि ईद-उल-अजहा की नमाज अपने-अपने मोहल्लों की मस्जिदों या ईदगाहों में शांतिपूर्ण ढंग से अदा करें और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या उकसावे से बचें। यदि कहीं कोई संदिग्ध या अप्रिय स्थिति दिखाई दे तो तुरंत प्रशासन को सूचना दें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।