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  • Green trees were used as poles, with 11,000 power lines dangling from bent poles; farmers were forced to abandon farming.

हरे पेड़ों को बनाया पोल, झुके खंभों से झूल रही 11 हजार लाइन; खेती छोड़ने को मजबूर किसान

 खखरेरू /फतेहपुर विद्युत विभाग जहां एक ओर स्मार्ट मीटर लगाकर व्यवस्था सुधारने का दावा कर रहा है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की हकीकत इसके उलट नजर आ रही है। रसूलपुर सानी पावर हाउस क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सभा कठारिया में विभाग की लापरवाही के कारण हरे-भरे पेड़ों को ही बिजली के पोल की तरह इस्तेमाल कर एलटी केबल बांधकर सप्लाई दी जा रही है। वहीं खेतों के ऊपर से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की जर्जर लाइन किसानों के लिए जानलेवा बनी हुई है।

ग्रामीणों का आरोप है कि मेवालाल धोबी के घर से पटेल के डेरा तक कई घरों में बिजली आपूर्ति हरे पेड़ों और बांस-बल्ली के सहारे की जा रही है। इससे किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है। गांव के राजेश यादव, श्रीराम पटेल, शिवगोविंद पटेल, दास्सू पासवान, सुफल पटेल समेत कई लोगों के घरों में इसी तरह अस्थायी व्यवस्था से बिजली पहुंचाई जा रही है।

इसी तरह गांव के कुलदीप तिवारी, कुंदन सिंह, मिश्रीलाल यादव, श्रवण कुमार शुक्ला और राजेश शुक्ला सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि गांव से होकर गुजर रही 11 हजार वोल्ट लाइन के करीब 8 से 10 खंभे पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। कई खंभे झुक गए हैं और तार महज 6 से 7 फीट की ऊंचाई पर झूल रहे हैं। इससे खेतों में ट्रैक्टर या कृषि उपकरण चलाने में बड़ा खतरा बना रहता है।

किसानों का कहना है कि हाईटेंशन तारों के नीचे आने वाले खेतों में खेती करना मुश्किल हो गया है। ट्रैक्टर से जुताई के दौरान तारों के छूने का खतरा बना रहता है, जिसके चलते कई किसानों ने पोल के नीचे आने वाले खेतों में खेती करना बंद कर दिया है। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि समस्या की शिकायत कई बार पावर हाउस कर्मचारियों और उच्च अधिकारियों से की गई, लेकिन अब तक न तो पेड़ों से बंधी एलटी लाइन हटाई गई और न ही झुके खंभों को दुरुस्त कराया गया। इससे गांव में हर समय जान-माल के नुकसान का खतरा बना हुआ है।

ग्रामीणों ने विद्युत विभाग से जल्द जर्जर पोल और तार बदलकर सुरक्षित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि किसी बड़े हादसे से पहले समस्या का समाधान हो सके।

इस संबंध में रसूलपुर सानी पावर हाउस के जेई राजेंद्र सिंह से बात की गई तो उन्होंने पूरे मामले में जानकारी न होने का हवाला दिया वहीं संवाददाता से मौके पर पहुंच कर लाइन दिखाने के लिए कहा तो सवाल उठता है कि क्या फीडर के लाइनमैन जेई साहब को रिपोर्ट नहीं करते हैं या फिर जेई साहब जान कर अनजान की भूमिका निभा रहे हैं।