नई दिल्ली। केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने कहा है कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र दक्षिण एशिया को खाद्य हानि से खाद्य नेतृत्व की ओर ले जाने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का बड़ा कृषि उत्पादक होने के बावजूद कटाई के बाद भंडारण, लॉजिस्टिक्स और प्रसंस्करण की कमियों के कारण भारी खाद्य हानि झेलता है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारत की केवल लगभग 17 प्रतिशत कृषि उपज ही प्रसंस्कृत होती है, जिसे 2030 तक 25 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य है। खाद्य प्रसंस्करण किसानों की आय बढ़ाने, रोजगार सृजित करने, खाद्य सुरक्षा मजबूत करने और निर्यात को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
चिराग पासवान ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना, पीएमएफएमई और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजनाओं के माध्यम से सरकार इस क्षेत्र को मजबूत कर रही है। उन्होंने जोर दिया कि तकनीक, गुणवत्ता, ट्रेसबिलिटी और निवेश के सहारे भारत तथा दक्षिण एशिया वैश्विक खाद्य मूल्य श्रृंखलाओं में अपनी मजबूत पहचान बना सकते हैं।
उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण न केवल आर्थिक विकास का माध्यम है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं और महिलाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा कर सकता है। सही नीति, निवेश और क्षेत्रीय सहयोग के जरिए दक्षिण एशिया खाद्य हानि को कम कर खाद्य नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ सकता है।