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  • Allegations of a scam worth lakhs of rupees in the beautification of Amrit Sarovar, villagers demanded a high-level investigation from the DM.

अमृत सरोवर सुंदरीकरण में लाखों रुपये के घोटाले का आरोप, ग्रामीणों ने डीएम से की उच्चस्तरीय जांच की मांग

खखरेरू/फतेहपुर  विकासखंड विजयीपुर की ग्राम पंचायत गुरगौला में अमृत सरोवर के सुंदरीकरण एवं अन्य विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता और सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान एवं ग्राम पंचायत अधिकारी पर बिना कार्य कराए लाखों रुपये के भुगतान का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।

ग्रामीणों अभिषेक प्रताप सिंह, धनंजय सिंह, नरेश सिंह समेत आधा दर्जन से अधिक लोगों द्वारा दिए गए शिकायती पत्र में बताया गया है कि ग्राम सभा में अमृत सरोवर तालाब के जीर्णोद्धार एवं सुंदरीकरण के लिए लगभग 38.89 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत हुई थी। आरोप है कि नियमानुसार मनरेगा श्रमिकों से कार्य कराए जाने के बजाय जेसीबी मशीन से खुदाई कराई गई। ग्रामीणों के विरोध के बाद कार्य रोक दिया गया, लेकिन इसके बावजूद ग्राम प्रधान मन्नू देवी और ग्राम पंचायत अधिकारी शिवनंदन सिंह ने कथित रूप से कार्य पूर्ण दर्शाकर 25 से 30 लाख रुपये का भुगतान निकाल लिया।

ग्रामीणों का आरोप है कि केवल अमृत सरोवर ही नहीं, बल्कि ग्राम सभा में नहर से चौकड़ी तालाब तक नाली खुदाई, खड़ंजा निर्माण तथा अन्य विकास कार्यों में भी व्यापक अनियमितताएं हुई हैं। उनका कहना है कि कई कार्य केवल कागजों में पूरे दिखाकर भुगतान करा लिया गया, जबकि मौके पर उनका कोई अस्तित्व नहीं है।

शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि मामले की पूर्व में हुई जांचों में भी अनियमितता बरती गई। उनका कहना है कि तत्कालीन जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित छह सदस्यीय जांच टीम ने बिना स्थलीय निरीक्षण किए ही कार्यालय में बैठकर रिपोर्ट तैयार कर दी। ग्रामीणों ने जांच अधिकारियों पर मिलीभगत कर फर्जी एवं मनगढ़ंत रिपोर्ट लगाने का आरोप लगाया है।

ग्रामीणों के अनुसार, 22 जनवरी 2026 को मनरेगा लोकपाल की टीम द्वारा भी मामले की जांच की गई थी, लेकिन उसकी रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है। इससे ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है।

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने, कथित फर्जी रिपोर्ट तैयार करने वाले अधिकारियों की भूमिका की जांच करने तथा दोषी पाए जाने पर ग्राम प्रधान, सचिव और संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर कठोर कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

शिकायतकर्ताओं में सत्य प्रकाश सिंह, दिनेश सिंह, टी. सिंह, दीपक सिंह, रंजना सिंह सहित दर्जनों ग्रामीण शामिल रहे।